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    छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिला, कैसे बनी "महिला-कमाण्डो" :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on March 19
    छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिला, कैसे बनी "महिला-कमाण्डो" :


    ✒क्यों मुख्यमंत्री ने कहा,
    अब महिला कमाण्डो रोकें अवैध शराब :

    छत्तीसगढ़, आदिवासी बहुल राज्य है. जहाँ कई परंपराएं ऐसे हैं जिसे सरकार द्वारा भी रोक पाना मुश्किल होता है. ऐसे ही है, हाथ से शराब बनाना. जो ग्रामीण अंचल में समाज की पुरानी परंपरा का निर्वाह करते रहें हैं ।
    जिसे दूसरे रुप में शराब माफिया अवैध तरीके से देेशी-अंग्रेजी शराब, राज्य के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में दलालों के माध्यम से उतारते रहे हैं. ऐसे में सरकार के सामने अवैध शराब रोकने बड़ी चुनौती रही है ।
    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अपने प्रदेश व्यापी लोक सुराज अभियान के अंतर्गत, कोरबा जिला के भैंसामुड़ा (विकासखण्ड करतला) गांव में आयोजित समाधान शिविर पहुंच कर वहाँ की महिलाओं को अवैध शराब पर पाबंदी लगाने के लिए संगठित होने और समाज में इसके दुष्प्रभावों की जानकारी देने के लिए "महिला-कमांडो" समूह गठित करने की सलाह दी ।
    मुख्यमंत्री, समाधान शिविर में ग्रामीणों से जिले में अवैध शराब की बिक्री के बारे में जानकारी ले रहे थे. इसी दौरान एक महिला ने बताया, कि गांव में छुट-पुट अवैध शराब और गांजे की बिक्री की जा रही है. डॉ. सिंह ने आबकारी विभाग के अधिकारियों को इस पर अंकुश लगाने के निर्देश भी दिए ।
    उन्होंने शिविर में उपस्थित महिलाओं से कहा कि वे "महिला-कमाण्डो" समूहों का गांव-गांव में गठन करें और लोगों को शराब और गांजे के दुष्प्रभावाओं के बारे में जागरूक करें ।
    ज्ञात हो कि, पिछले महीने दुर्ग में राज्य स्तरीय महिला पुलिस स्वयंसेवक "चेतना" कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा ही किया गया था. जिसका उद्देश्य ही महिलाओं को जागरूक करने, और उनके माध्यम से समाज में जागृति लाने का प्रयास ही हैं ।
    "महिला-कमांडो" ग्रामीण महिलाओं का एक स्वयंसेवी संगठन हैं. जो व्यक्तिगत होते हुए, समूहों के रुप में संगठित होकर गांव में शांति व्यवस्था कायम करते हुए ग्रामीण विकास की भागीदार बनते रहे हैं ।
    यह उल्लेखनीय है कि, छत्तीसगढ़ के छोटे से कस्बे गुण्डरदेही ब्लॉक मुख्यालय से लगभग दस साल पहले शुरू हुई, यह कार्यक्रम एक स्वयंसेवी संस्था सहयोगी जन-कल्याण समीति की सोंच थी. जो बाद में सरकार के संज्ञान में आई और आज यह गुण्डरदेही के बालोद जिला सहित, आसपास के ग्यारह जिलों में "महिला-कमांडो" समूह चल रहा है.
    इनका संचालन समीति की अध्यक्ष श्रीमती शमशाद बेगम करते रहीं हैं. जिन्हे भारत सरकार द्वारा वर्ष 2012 में "महिला-कमाण्डो" की शुरुआत कर बेहतर संचालन करते कामयाबी के लिए ही "पद्म-श्री" सम्मान से सम्मानित किया गया था ।

    - घनश्याम जी.वैष्णव बैरागी
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