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    मेरा शहर, छोटा भारत ; जहाँ -

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on December 19, 2017
    मेरा शहर, छोटा भारत ; जहाँ -

    सरस मेला से स्व-सहायता समूहों को मिला सम्मान :
    17 राज्य के 149 समूहों ने 12 दिन तक किया अपने उत्पादनों विक्रय प्रदर्शन :

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    भिलाई-दुर्ग : 19 दिसम्बर/2017 -
    भिलाई का स्टील प्लांट जिस तरह से पूरे एशिया में अपना छाप छोड़ा है, यहाँ की सांस्कृतिक विरासत भी कहीं पर भी कम नहीं । जहाँ भारत के लगभग सभी राज्य से लोग भिलाई में निवासरत हैं । जहाँ भाईचारे की अमिट मिसाल देखने मिलता है । इसी भिलाई के सिविक सेंटर में लगाए गए सरस मेला का समापन हुआ ।
    भिलाई-दुर्ग में भारत की जो सांस्कृतिक मिश्रण व लघु भारत की झलक देखने को मिलती है, उस मिसाल को यह सरस मेला, यहाँ बनाए रखने का काम किया है ।
    जहाँ पर स्व-सहायता समूहों के द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीदी कर अपने देश की कला-संस्कृति को सम्मान देने के साथ ही स्वदेशी सामानों का सम्मान भी यहाँ के निवासियों ने किया है ।
    महिलाएँ समूह बनाकर देश की संस्कृति को आगे बढ़ा रहीं हैं । इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने में मदद मिल रही है । जिस दिन से स्व-सहायता समूह अवधारणा बनी, उस दिन से उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है, इससे समूहों का सम्मान बढ़ा है ।
    उल्लेखनीय है कि सरस मेला का आयोजन 6 से 17 दिसम्बर तक, 12 दिन किया गया । सरस मेला में 17 राज्यों के 149 स्व-सहायता समूहों ने भाग लिया । यहाँ आयोजित सरस मेला में 1 करोड़ 10 लाख रूपए का व्यवसाय हुआ है, जो अब तक की सभी सरस मेला की रिकार्ड बिक्री है ।।
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    - घनश्याम जी.बैरागी
    08827676333
    gbairagi.enews@gmail.com
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