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    भिलाई में भिलाईयंश को सम्मान तो मिलनी ही चाहिए :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on Mon at 3:17 PM
    भिलाई में भिलाईयंश को सम्मान तो मिलनी ही चाहिए :

    स्थानीय मांगों सहित कई मुद्दों पर बनी प्रारंभिक सहमति,
    भिलाई इस्पात संयंत्र के सीईओ के साथ बैठक :

    भिलाई : हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन ( सीटू ) के प्रतिनिधि मंडल एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एम रवि के मध्य स्थानीय मांगो को लेकर चर्चा हुई एवं कई मुद्दों पर प्रारंभिक सहमति बनी.
    बैठक के बाद ऐसा लगा कि, भिलाई में अब भिलाईयंश को मिलेगा सम्मान.

    मुद्दे -

    मृत्यु पश्चात कर्मियों के बच्चों को मिले मेडिकल एवं स्कूली सुविधा -

    संयंत्र की किसी कर्मी की मृत्यु हो जाने के पश्चात कर्मी के पत्नी की चिकित्सा सुविधा जारी रहती है, किंतु उनके बच्चों को चिकित्सा सुविधा बंद कर दी जाती है, एवं स्कूलों में भी बच्चों को नॉन BSP घोषित किया जाता है, जिसे सुधारने के लिए सीटू की लंबे समय से माग रही है.
    इस विषय पर सी ई ओ ने सकारात्मक पहल करते हुए मृत कर्मी के बच्चों को मेडिकल एवं स्कूली शिक्षा जारी रखने हेतु उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया.

    स्वयं के प्रमाण  पत्र पर एचपीएल लेने की सुविधा में हो वृद्धि -

    एचपीएल को कम्युट करवाने हेतु मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती थी. सीटू के मांग पर पिछले कार्यकाल में 3 दिन का एचपीएल बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के स्वयं के प्रमाणित प्रमाण पत्र पर साल में दो बार लेने हेतु सुविधा प्रारंभ की गई थी.
    यह सुविधा को बढ़ाने हेतु सीटू ने बात रखी जिस पर उचित करवाई करने का आश्वासन सीईओ के द्वारा  दिया गया.

    सी एल गणना करने के तरीके में हो परिवर्तन -

    भिलाई इस्पात संयंत्र में सी एल की गणना करने के तरीके पर बात को रखते हुए सीटू ने कहा कि “किसी कर्मी के द्वारा लिये जा रहे सी एल के बीच यदि उस कर्मी का साप्ताहिक अवकाश पड़ता है, तो उस साप्ताहिक अवकाश को सी एल में गणना नहीं किया जाना चाहिए, अर्थात कोई कर्मी शनिवार और सोमवार को सी एल लेना चाहता है, एवं उस कर्मी का साप्ताहिक अवकाश यदि रविवार है तो उस कर्मी को शनिवार रविवार एवं सोमवार के लिए 3 दिन का सी एल देना पड़ता है”
    ऐसा ना हो कर उसे केवल शनिवार और सोमवार के लिए ही सी एल देने हेतु आवश्यक कार्यवाही किया जाना चाहिए, जिस पर सीईओ ने आवश्यक कदम उठाने हेतु पर्सनल विभाग को कहा.

    उत्पादन उत्पादकता पर अलग से होगी बैठक -

    चर्चा के दौरान यूनियन एवं प्रबंधन के बीच इस बात पर सहमति बनी कि उत्पादन उत्पादकता के संदर्भ में जल्द से जल्द बैठक आयोजित की जाएगी. जिसमें विभिन्न विभागों के अंदर कार्य कर रहे कर्मी वहां की मशीनरी एवं वहां हो रहा है.
    उत्पादन के संदर्भ में चर्चा कर और बेहतर स्थिति निर्माण करने हेतु कार्यक्रम बनाया जाएगा एवं प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पूरे संयंत्र के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को एच आर डी सेंटर में बुलाकर उनसे चर्चा-परिचर्चा कर उनका सुझाव लेकर संयंत्र को जल्द से जल्द उभारने हेतु क्रॉप की तरह ही ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया जावेगा.

    इंसेंटिव स्कीम पर नए सिरे से परीक्षण करने बनी सहमति -

    भिलाई इस्पात संयंत्र जब 4 मिलियन टन हेतु तैयार हुआ था तब संयंत्र में लगभग 55 हजार से ज्यादा कर्मी कार्यरत थे.
    उस समय का बना हुआ इंसेंटिव स्कीम अभी तक चल रहा है, जिसमें एक समझौते के दौरान यह तक लिखा गया कि मापित क्षमता का 125 प्रतिशत उत्पादन करने पर शत प्रतिशत इंसेंटिव मिलेगा, जो कि नियमानुसार गलत था.
    सीटू ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि अब संयंत्र में लगभग 22,000 कर्मचारी अधिकारी कार्यरत हैं एवं संयंत्र की क्षमता बढ़कर 7 मिलियन टन होने जा रही है. ऐसे में उत्पादन उत्पादकता के आधार पर नया इंसेंटिव स्कीम पर कार्य प्रारंभ किया जाना चाहिए.
    सीईओ ने इस विषय पर अपनी सहमति जताते हुए इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को बुलाकर इंसेंटिव के मुद्दे पर आज की वर्तमान स्थिति के मद्देनजर अध्ययन कर नया इंसेंटिव स्कीम पर कार्य शुरू करने  का निर्देश देने की बात कही.

    एलाउंसेस पर होगा परीक्षण -

    भिलाई के अस्पतालों एवं फायर सर्विस में कार्य करने वाले कर्मियों के लिए वर्दी निर्धारित रहती है. अतः उन्हें मिलने वाले वाशिंग एलाउंस को बढ़ाने की मांग की गयी, साथ ही क्लास 5 तक पढ़ने वाले BSP कर्मी के बच्चों को ड्रेस का अलाउंस दिया जाता है जो कि लगभग 185 रुपया है.
    यह आज से लगभग 20 साल पहले निर्धारित किया गया था. जिस पर आज के संदर्भ में बदलने की जरूरत है उपरोक्त विषय पर सीईओ ने कार्मिक विभाग को अध्ययन करने को कहा.

    एजुकेशन एवं हाउसिंग पर अलग से होगी बैठक -
    भिलाई इस्पात संयंत्र का शिक्षा विभाग एवं हाउसिंग सेक्शन संयंत्र के दो महत्वपूर्ण विभाग है जो कर्मी एवं उनके परिजनों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है एवं इन दोनों विषयों पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है. सीईओ ने इस बात पर अपनी सहमति जताई कि इन दोनों विषयों पर अलग से प्रस्तुतिकरण के साथ चर्चा कर आवश्यक कदम उठाया जावेगा.

    छोटे विभाग भी आए फैक्ट्री के दायरे में -

    भिलाई इस्पात संयंत्र में बहुत से ऐसे छोटे-छोटे विभाग हैं जो फैक्ट्री के दायरे में नहीं आते. अतः इन विभागों में कार्य करने वाले कर्मी संयंत्र के अंदर एक विभाग से दूसरे विभाग जाते समय या अपने विभाग के अंदर ही काम करते समय दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं तो उनकी इंजुरी फॉर्म भरने से लेकर अन्य सुविधाओं को हासिल करने हेतु बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
    इस पर चर्चा के पश्चात सीईओ ने कहा कि छोटे विभागों को भी फैक्ट्री के दायरे में लाते हुए वहां के कर्मचारियों को सुरक्षा सहित अन्य सुविधाएं किस तरीके से दिया जाए इस विषय पर कार्य किया जाना चाहिए.

    अनफिट प्रोसेस के लिए सीटू ने दी प्रबंधन को धन्यवाद -

    पिछले दिनों सीईओ स्तर पर चर्चा के पश्चात प्रबंधन ने नौकरी एवं बिना नौकरी हेतु भरे जाने वाले आवेदन पत्र को अलग अलग कर दिया, जिससे कर्मियों के बीच की भ्रामकता एवं उन्हें एवं उन कर्मी के द्वारा नौकरी हेतु अनफिट होने के लिए दिए गए पत्र पर बिना नौकरी वाले अनफिट करने जैसी दुविधा की स्थिति अब समाप्त हो गई है.
    यूनियन से चर्चा पश्चात प्रबंधन के द्वारा किए गए इस कार्य के लिए यूनियन ने प्रबंधन को धन्यवाद दिया है.
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