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    आज भी प्रासंगिक है, छत्तीसगढ़ के संत का संदेश :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on December 29, 2017
    आज भी प्रासंगिक है, छत्तीसगढ़ के संत का संदेश :

    गुरु घासीदास के विचारों की प्रासंगिकता पर गोष्ठी संपन्न :
    भिलाई : 18 दिसम्बर बाबा गुरू घासीदास के जन्म दिन से 31 दिसम्बर तक छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों से लेकर, गांव के मोहल्लों तक जयंती समारोह मनाकर गुरु के आदर्शों को आत्मसात करने का प्रयास होता है ।
    दलित शोषण मुक्ति मंच द्वारा भिलाई सेक्टर 4 में गुरु घासीदास बाबा के विचारों का वर्तमान में प्रासंगिकता विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया था, गोष्टी में वक्ताओं ने गुरु घासीदास बाबा के जीवन पर प्रकाश डाला |
    € आर्थिक विकास के साथ जाति व्यवस्था को खत्म करना जरूरी -
    गोष्ठी में कहा गया, जब तक आर्थिक विकास के साथ-साथ जाति व्यवस्था को दूर नहीं करेंगे, तब तक भारत सही रूप में विकास नहीं कर पाएगा | कुछ ताकतें लगातार धर्म, जाति, भाषा के नाम पर लोगों के बीच भेदभाव पैदा करके देश को इसी भंवर जाल में फंसाकर अपने स्वार्थ को सिद्ध करने में लगे हुए हैं | ऐसे समय में गुरु घासीदास के विचार और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं जिन्होंने यह कहा था कि “मनके मनके एक बरोबर” अर्थात मानव मानव एक समान हैं उनके बीच भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए |
    धर्म और जाति के भंवर में फंसा हुआ कोई भी देश विकास नहीं कर पाया ना ही प्रगतिशील देशों की श्रेणी में शामिल हो पाया है |
    € बाबा घासीदास ने दिया था सत्य बोलने का संदेश -
    गोष्ठी में कहा गया, कि सत्य के रास्ते पर चलें, सत्य का व्यवहार करें, सत्य का साथ दें, और सच ही बोले यही बाबा का संदेश था और बाबा का यह मानना था कि ऐसा करने से आपस में प्रेम और विश्वास बढ़ेगा समाज में सभी मानव एक दूसरे का सम्मान करेंगे और हम यह जाति-पाति के बंधनों से ऊपर उठ जाएंगे |
    संत महात्मा ज्यादा नहीं बोलते बल्कि आचरण करते हैं और समाज को संदेश देते हैं कि ऐसा आचरण से ही समाज में परिवर्तन आएगा |
    € सरकारे करती हैं सुनियोजित साजिश -
    गोष्ठी में यह भी कहा गया, कि वामपंथी ताकतों ने हमेशा से ही इन्हीं गुरुओं और विद्वानों की बातों को आगे बढ़ाया है | दुनिया में हर समय उस समय विशेष एवं परिस्थितियों को लेकर सामाजिक बदलाव के लिए काम करने वाले लोग पैदा होते रहे हैं और समाज विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं ।
    छत्तीसगढ़ में बाबा घासीदास भी उन्ही में से एक हैं |
    देश में जो सफाई कर्मी काम करते हैं उनमें दलित वर्ग के लोग सबसे ज्यादा हैं किन्तु सरकार उनके काम को उचित वेतन देने के बजाय आउट सोर्स करती जा रही है ताकि उस काम को कम से कम वेतन देकर पूरा करवाया जा सके, ऐसा करने से उन साथियों के पास आर्थिक मजबूती नहीं आएगी, जिससे की वे पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसी ही काम में लगे रहेंगे |
    € वर्किंग क्लास है शोषित तबका -
    गोष्ठी के संबोधन में यह बातें भी आई, कि मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में वर्किंग क्लास सबसे शोषित  तबका है | ऐसे में मजदूर वर्ग के लिए ऐसे आयोजन बहुत जरूरी है क्योंकि जिस तरीके के हालात देश के अंदर पैदा किया जा रहा है, वह मेहनतकश वर्ग के लिए ठीक नहीं है | इसीलिए शोषण के विरोध में समानता के सिद्धांत को मजबूत करने के लिए गुरु घासीदास के विचार वर्तमान समय में बहुत ज्यादा मायने रखते हैं
    € मानने से ज्यादा जरूरी है जानना -
    दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक ने कहा कि, जो अक्सर संत महात्माओं और विद्वानों को मानने लगते हैं एवं मानते मानते उनकी पूजा अर्चना करने लगते हैं, किंतु उनके द्वारा कही गई बातों को जानने की कोशिश नहीं करते | यही कारण है कि गुरु घासीदास बाबा हो या बाबासाहेब आंबेडकर हो इनके द्वारा कहे गए बातो एवं समाज विकास के लिए इनके द्वारा बताए गए विचारों को जानकर उस पर अमल करने की वजह हम उनकी तस्वीर और मूर्तियां बनाकर पूजा करने लग गए हैं, जबकि बाबा घासीदास और बाबा साहब अंबेडकर दोनों ने ही मूर्ति पूजा का विरोध किया था |
    यह महान विभूतियां पूरे देश और विश्व के लिए अपने संदेशों को दिए हैं किंतु हमने छोटे छोटे समूह पंथो एवं जातियों में बठकर उनके संदेश को समाज में फैलने से जाने अनजाने में रोकते आए हैं जो कि सामाजिक सुधार के लिए सही नहीं है |
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    - घनश्याम जी.बैरागी
    08827676333
    gbairagi.enews@gmail.com
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