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    लाजवाब ग्यानी

  • Amit k. Pandey 'Shashwat'
    Amit k. Pandey 'Shashwat'
    • Posted on October 24, 2017
    लाजवाब ग्यानी
    तीन मित्र थे .एक हिंदी का ज्ञाता था , एक अंग्रेजी का और एक संस्कृत का . लेकिन वे थे भी एक समान ही अवसरवादी .तीनों को विशेष सहायता से विदेश जाने का मौक़ा मिला. तीनों ने आपस में विचार किया की आज भी भारत के विषय में पुराने या प्राचीन सन्दर्भ का बड़ा क्रेज लगता है क्यों ना मौके का फायदा उठाय. हिंदी के विद्वान् ने अपने पूर्वजों द्वारा लिखित पुस्तक दिखाके अपना प्रभाव बढ़ाया , तब अंग्रेजी के ज्ञाता ने भी भारत में अंग्रेज द्वारा रचित प्राचीन पुस्तक प्रस्तुत करके वाह वही बटोरी . अब तो संस्कृत के विद्वान् से असहनीय हो गया . उसने बड़े जतन से रखी प्राचीन पुस्तक निकाली और बोला यह पुस्तक नालंदा के खँडहर से मेरे पूर्वजों को मिली थी . इतना सुनना था की खलबली मच गई. संस्कृत विद्वान् को पुस्तक सहित गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में जब इन्वेस्टीगेशन हुआ तो संस्कृत के विद्वान् को छोड़ दिया गया . एरोड्रम पर वह जल्दी जल्दी दौड़ के पंहुचा तो विद्वान् मित्रों ने उसे देखा और आश्चर्य से पूछा की तुम बचे कैसे ? भाग तो नहीं आय . संस्कृतविद्द के पीछे आये सुरक्षाकर्मी ने मुस्कराके के कहा " इसका पुस्टक का कापी हमरे पास पहले ही आ गया हे .".
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