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    मिठाई का कपड़ा

  • Amit k. Pandey 'Shashwat'
    Amit k. Pandey 'Shashwat'
    • Posted on October 30
    मिठाई का कपड़ा
    एक सरदार जी ने मिठाई दुकान में आर्डर दिया - दो पेठे देना जी . तभी एक नौजवान आया दूकान दार से बोला - मुझे २५० ग्राम मुरब्बा दो और एक तरफ से एकाएक धुप में पसीने पोछते एक बुजुर्ग ने माँगा -- हमको दोठो भतुआ पाग देना भाई . पास खड़े एक टाई -पैंट धारी को कुछ लगा , वह बस का इन्तजार छोड़के इधर ही ध्यान किया . दुकानदार ने तीनो को एक ही मिठाई अलग अलग दी . इंटरव्यू को जाते नवयुक की बेसब्री भी तीन गुनी हो गई . उसे समझ नहीं आया की आखिर पूछे तो किस से की जिज्ञासा शांत हो . तीनो ग्राहक चले गए तो वह दुकानदार से पूछा - सर जी , आपने अलग अलग नाम होने पर भी तीनो को एक ही वास्तु , एक ही आकर प्रकार की दी . यह माजरा क्या है. दकानदार मुस्कराने लगा . ये व्यक्ति अलग अलग प्रदेश से है . इससे मिठाई का नाम भी अलग बोले . युवक भौचक हो गया . दुकानदार ने पूछा -क्या हुआ . पसीना पोछते युवक ने कहा - नौकरी के लिए जा रहा था . मिलनी तो है नहीं . सोच रहा था की पिता जी से झगड़ा करके पैसे ले लूंगा और व्यपार करूंगा . मगर इसमें भी बिना नॉलेज के काम नहीं चलेगा . क्या आप ऐसे नामकरण वाले प्रदेशों में रहे हैं , वैसे आप हैं कहाँ से ? संघर्षशील युवा को देखते हुए अनुभवी दुकानदार ने कहा --- कहीं का नहीं . युवक चिंतित सा हो गया . दुकानदार ने पूछा -तुम कहाँ से हो ? युवक मैं तो दक्षिण से हूँ . लगते तो नहीं . कैसे ?. अरे बेटा मैं उत्तर से तो हूँ , लेकिन तुम जहा से चलने जा रहे हो यही हाल मेरा भी हुआ था . आज मैं जहां जाता हूँ वहीँ अपना सा लगने लगता है . बुजुर्ग ने फिर कहा -समझ लो की इस मिठाई ने कपडे नहीं पहने. और दोनों के ठहाके निकल पड़े
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