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    @ बहुतेरे प्रश्न है । और मुद्दे भी ।।

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on February 1
    @ बहुतेरे प्रश्न है । और मुद्दे भी ।।


    भारत में मीडिया की भूमिका आम-जन-मानस के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई है, जहां गांव-गरीब से लेकर राजनेता और उद्योग जगत के लोगों की असली तस्वीर दिखाती, देश की मीडिया ने हमेशा न्याय किया है।
    लेकिन कई मामलों में जवाब देते, राजनेताओं और उद्योग-जगत से जुड़े हुए लोगों का मीडिया के प्रति बेरूखी, देखते ही बनती है । जब इन्हे सवाल पूछा जाता है तब इनके झल्लाहट साफ दिखती है ; चाहे कोई भ्रष्टाचार का मामला हो या कोई न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद जवाब !
    लेकिन, आम-जनमानस इस प्रतिक्रिया को बखूबी महसूस करते है, चाहे वह मीडिया के माध्यम से समाचार देखें या पढ़ें ।
    एक और सवाल खड़े कर मीडिया की स्वतंत्रता पर लगाम लगाने काम पिछले दिनों किया गया । यह है, पेड न्यूज पर अंकुश ?
    पेड न्यूज है क्या ?
    ऐसा समाचार जो टेबल पर बनता है , और अखबारों में अच्छे कॉलम के साथ प्रकाशित हो जाता है । या ऐसे न्यूज जिसे किसी पात्र विशेष के लिए उनके व्यक्तिगत लाभ की दृष्टि से लिखा जाए और प्रकाशन हेतु, समाचार-पत्रों और न्यूज चैनलों को भेज दिया जाता है ।
    पूरे देश में नये सर्वे के अनुसार, 13,000 से भी अधिक, अखबार और न्यूज चैनल संचालित है । क्या पेड न्यूज को रोकने प्रत्येक न्यूज घराने तक निगरानी समिति पहुँच पाएँगी ! या न्यूज प्रकाशित होने के बाद कार्रवाई की दिशा तय किया जाएगा ? या फिर निगरानी समितियों का विस्तार इन न्यूज ब्रीफिंग के क्षेत्रों तक होगा । या निगरानी समिति फिल्मों के लिए बनाई गई सेंसर बोर्ड की तरह काम करेगी । और जो समिति बनेगी क्या वह राजनीत से प्रेरित तो नहीं होगी ? और क्या पत्रकारिता के जानकार सामिल किये जानेे चाहिए ।
    प्रश्न सामने आए थे । क्योंकि, इस बिंदु पर कार्य करने ही होंगे ; तभी पेड न्यूज पर बनी कोई भी कानून या कोशिश सफल होगी । और मीडिया की स्वतंत्रता भी कायम रह पायेगी ।।
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    - घनश्याम जी.वैष्णव बैरागी
    08827676333
    gbairagi.enews@gmail.com
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