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    17 साल छत्तीसगढ़ ; 14 साल डॉ. रमन सरकार ।। क्यों नहीं सुधरे किसानों के हालात ! जश्न खत्म ; प्रश्न बाकी ? मुद्दे वही :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on December 16, 2017
    17 साल छत्तीसगढ़ ; 14 साल डॉ. रमन सरकार ।। क्यों नहीं सुधरे किसानों के हालात ! जश्न खत्म ; प्रश्न बाकी ? मुद्दे वही :
    धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में आज धान की फसल लगाने वाले किसान परेशान है ! कारण पानी की कमी ? जबकि, दुर्ग और रायपुर संभाग में आधा दर्जन से अधिक छोटे-बड़े बांध है जो सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ही निर्माण किए गये हैं । पर इन बांध के पानी का या तो सिंचिंत क्षेत्रों के लिए सहीं ढंग से इस्तेमाल नहीं हो पाता, या फिर किसी अन्य क्षेत्रों को पानी आबंटित हो जाती हैं ? और किसानों के एग्रीमेंट किये खेत सूखे ही रह जाते हैं !!
    कुछ महीने पहले, छत्तीसगढ़ के दुर्ग में कृषक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई थी । जिसमें अंचल के प्रगतिशील किसान शामिल हुए । किसानों ने कृषि एवं इससे संबंद्ध विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में राज्य सरकार द्वारा उनके कल्याण के लिए संचालित योजनाओं की खामियों और खूबियों के बारे में विचार-विमर्श किया ।
    किसानों ने आमदनी दो-गुनी करने के लिए कई सुझाव भी दिए ।
    समिति की बैठक में किसानों ने कहा कि अंचल के किसान रबी के मौसम में धान के बदले दलहन-तिलहन की फसल उगाने की इच्छा रखते हैं । लेकिन, राज्य सरकार को इनके लिए घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदी का इंतजाम करना चाहिए । कहा गया, कि धान की फसल में अपेक्षाकृत कम लाभ होने के बावजूद छत्तीसगढ़ के किसान खेती को मूल काम मानते हुए धान की फसल ही उगाते हैं । क्योकि, इसकी खरीदी की समुचित व्यवस्था होती है ।
    किसानों ने अरहर और टमाटर की फसल का उदाहरण भी दिया । किसानों के पास अत्यधिक उत्पादन होने से अरहर की दाल 60-70 रूपए प्रतिकिलो के हिसाब से बिक रही है जबकि पिछले वर्ष यह डेढ़-दो सौ रूपए में बिकी थी । इसी तरह टमाटर का हाल है । किसान के खेत में टमाटर नहीं है तो एक सौ रूपए किलो हो गई । जबकि दुर्ग संभाग में ही पिछले जनवरी-फरवरी महीने में सैकड़ो क्विंटल टमाटर को रोड़ के उपर फेंकना पड़ा था । ऐसी अनिश्चिता के माहौल में परम्परागत किसान जोखिम कैसे ले सकता है । किसानों ने इस विसंगति की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया और कुछ सार्थक पहल करने का आग्रह किया ।
    समिति की बैठक में उपस्थित किसानों ने खेती-किसानी के काम को और ज्यादा फायदेमंद बनाने के विभिन्न उपायों पर खुला विचार-विमर्श किए ; इसमें एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि, किसानों की आमदनी दो-गुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल तभी फलीभूत होगी जब हर खेत को पानी मिलेगी । यहाँ के बांध बनाये तो गये थे कृषि क्षेत्र को सिंचाई कराने के लिए ; लेकिन, इंडस्ट्रीज क्षेत्र के साथ एग्रीमेंट होने की वजह से बांध का पानी किसानों के खेतों तक नहीं पहुँच पाता ? जबकि, धान की फसल को अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है । और दलहन-तिलहन का कोई खरीदी विकल्प राज्य सरकार द्वारा नहीं बनाया गया है ।
    कृषक कल्याण परिषद के उद्देश्य के बारे में कहा गया कि, कृषि से जुड़ी समस्याओं का विभाग के साथ मिलकर समाधान निकालना पड़ेगा । किसानी के काम में उन्नत तकनीकी अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए । रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के कुप्रभाव से अवगत कराते हुए जैविक खेती को इसका विकल्प बताया गया। विशेष तौर से दुर्ग जिले के ही अरसनारा के किसान नंदकुमार साहू की जैविक खेती की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की गई ।
    जैविक कीटनाशक स्थानीय तौर पर बनाने की विधिया भी बताई जानी चाहिए । अतिरिक्त आमदनी के रूप में मछलीपालन, डेयरी, बकरीपालन, बतखपालन आदि व्यवसाय अपनाने की दिशा में प्रयास हो ।
    इन कामों के लिए राज्य सरकार द्वारा काफी अनुदान भी मिलता भी है। लेकिन, इसका सहीं उपयोग हो पाता ।
    आज चुंकि, दलहन-तिलहन के फसलों का मौसम है, धान की कटाई हो चुकी है । फिर भी किसान इंतजार में हैं ? क्योंकि, व्यवस्था सुधरे तो किसान की हालात में सुधार होगी ।
    कल तक जो धान का कटोरा खाली-खाली दिखता था ।
    आज वह कटोरा फसल परिवर्तन कर अनाज से भरा जा सकता है ।।
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    - घनश्याम जी.बैरागी
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