Participating partners:


    योगा , फ़ायदे की फेहरिस्त

  • kapil pandya
    kapil pandya
    • Posted on July 3
    योगा , फ़ायदे की फेहरिस्त
    हम अच्छे से जानते हैं की भोली शक्ल वाले,साफ दिल वाले, प्रतिभाशाली, सुसभ्य, सु संस्कृतिक इंसान की तरफ हमारा आकर्षण सहज ही हो जाता है इसी फिनोमिनन को ध्यान में रखकर एक अमरीकी प्रोफेसर जोसफ न्ये ने शब्द दिया था सॉफ्ट पॉवर।
    सॉफ्ट पावर का अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से बड़ा ही महत्व है सॉफ्ट पावर को हम यूं समझ सकते हैं कि यह किसी भी देश का वह चुंबकीय आकर्षण है जो अन्य देशों को अपनी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से अपनी तरफ खींचे।
    भारत में सॉफ्ट पावर बनने की अपार संभावना है हमारा हर एक ग्रंथ और वेद संभावनाओं की प्रचुरता का बखान करता है पर फिर भी आज हम विश्व के शीर्ष 30 सॉफ्ट पावर देशो में सम्मिलित नहीं हो पाए हैं क्यों??? कमी है इच्छाशक्ति की कमी है विजन की कमी है मार्केटिंग की
    जंगल में मोर नाचा किसने देखा??
    इतने सालों बाद कोई जब इन सॉफ्टपावर प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग कर रहा है तो हम उसकी विदेश यात्राओं का मजाक बना लेते है । असल मे हम बहुत की कन्फ्यूज्ड है हमे खुद नही पता कि हम चाहते क्या है। विदेश यात्राओं पे तंज कसने वाले कुछ विपक्षी छुटभैया नेताओं को तो हमारे ग्लोब के कई देशों के नाम भी PM मोदी की यात्राओं के बाद पता चले होंगे। उन्हें कौन समझाए की उन यात्राओं की वजह से विश्वभर के लोग हमें सुनने लगे है। इंडियन डायस्पोरा को संबोधित करते बहुत मीडिया कवरेज पाया है pm ने विदेशो में भी। इस वजह से वहा के लोगो की भारत मे दिलचस्पी बढ़ने लगी है। कल्चरल टूरिस्म बढ़ रहा है। भारत की संस्कृति और आर्थिक संभावनाओं के गुणगान और प्रचार के अथक प्रयासों का परिणाम है कि हाल ही में यूनाइटेड नेशन की आर्थिक और सामाजिक काउंसिल के चुनाव में भारत को अपने अगले कार्यकाल के लिए 183 मतों से चुना गया जबकि हमारे पड़ोसी पाकिस्तान को मात्र 1 वोट मिला हैं। उन यात्राओं का सामरिक महत्व समझना होगा उनका उपहास करने से पहले।
    21जून को पूरे तीन साल होंगे योग दिवस को मनाना प्रारम्भ किये हमे। ये जानकर ताज्जुब होगा कि मोहनजोदड़ो से मिली प्राचीन पशुपति मुहरों पर बनी योग मुद्राओ का साक्ष्य कहता है कि योग भारत की करीब 10000 साल पुरानी एसेट हैं। ये विजन की कमी ही तो थी जो अब लोग इतने सालों बाद इसका मतलब समझ रहे है।
    आइसोलेशन के दौर में लोगो को आपस मे जोड़ने का योग से बेहतर कोई विकल्प नही। योग जोड़ता है मनुष्य के तन, मन और चिंतन को। हिन्दू दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीव आत्मा, परमात्मा का ही अंश है इन आत्मा और परमात्मा को जोड़ने की प्रक्रिया मानते थे ऋषि मुनि योग को।
    नैतिक और चारित्रिक पतन का कारण है हैबिट्स में डिसिप्लिन का न होना जिससे हमारे शब्दो पर हमारा कंट्रोल कम होता जाता है। जो मानसिक शांति से पुनः प्राप्त किया जा सकता है। जिसके लिए योग अनिवार्य है। पर योग भी राजनीति से कब तक बच के रह सकता था ?? जहाँ एक तरफ रिकॉर्ड 193 देशों ने योग के लिए UN में समर्थन दिया है तो यहां ख़ुद हमारे ही देश मे दिग्विजयसिंह जैसे बुद्धजन एक पूरे एंटी योग खेमे के प्रतिनिधित्व कर के ये सिद्ध कर रहे है कि वो औरो से अलग सोचते है। वो पतंजलि के विचारों का खंडन कर अपनी दलगत राजनीत को वैचारिक मजबूती दे रहे है।
    लगे हाथ ये नारा भी लगा लेना चाहिए कि सर कटा सकते है लेकिन भ्रामरी कर सकते नही।
    योग भी खुद सोच रहा होगा कि कहा चलते चलते UN तक पहुच गया। यहां गुमनामी के अंधेरो में कुछ योगियों तक था तब तक खुश था। अब कुछ लोगोे से मिले रिजेक्शन के बाद मुझे खुद पे डाउट होने लगा है। घुटन होती है राजनीतिक लांछनों से।
    योगा चर्चो में आने से पहले सबका था जब से मोदीजी ने इसे विश्व मंच पर लाया ये बस कुछ राइट विंग एक्टिविस्ट का बन गया है। लोगो ने ज्यूँ ही योगा के अपने अधिकारों को छोड़ा तो योग भी गहरी लंबी साँस अंदर की तरफ लेते हुए मोदीजी से बोला की "ना जाने किस अदा से लिया तूने मेरा नाम, की दुनिया समझ रही है सब कुछ तेरा हूँ मै"
    किसी दुकान से कोई बेहतरीन प्रोडक्ट ले आने के बाद हम उस दुकान के और उत्पादों में भी दिलचस्पी लेने लगते हैं। मोदीजी की मार्केटिंग स्किल और योग जैसे खरे प्रोडक्ट की वजह से आज दुनिया के लोगों का भारत की तरफ रुझान बढ़ा है लोग भारत की सांस्कृतिक विरासत की तरफ उम्मीद की नजर से देखते हैं आज वह हिमालय और गंगा की तरफ योग की वजह से आकर्षित हुए हैं। हमारे धार्मिक साहित्य ग्रंथों शास्त्रीय संगीत व नृत्य ग्रामीण रीति रिवाजों आदि की अच्छी मार्केटिंग करके हम भारत को ज्यादा अपीलिंग बना सकते है।
    तारीफ करनी होगी योगा जैसे इनिशिएटिव की आज इसकी वजह से हमारे पास महंगी एलोपैथिक मेडिसिन का बेहतरीन विकल्प है। इसकी वजह से भारत के कई बेरोजगार युवाओ के पास योग शिक्षक बनकर योग का प्रचार-प्रसार करने के अवसर मौजूद हैं । इस शुरुआत के बाद वर्ष वर्षों तक नेगलेक्ट रहे योगी और ऋषियो के भी अच्छे दिन आ गए हैं। रामदेव जी के स्वदेशी ब्रांड पतंजलि को विदेशों में भी अच्छा हाइप मिल रहा है।
    योग जैसी भारत की ऐसी कई गुमनाम विधाओं के बारे में Google पर खोजा जा रहा है ।
    आयुर्वेद योगा यूनानी सिद्धा तथा होम्योपैथिक के योग से बना भारत का इंडिजेनस आयुष मेडिसिन सिस्टम अब अंधेरों से उजालों की तरफ चल पड़ा है । बहुत मुमकिन है कि कल इसका पूरे विश्व में नाम हो जाए ।
    कल को हम जर्मनी को भी पछाड़ कर विश्व की सबसे बड़ी सॉफ्टपॉवर बन सकते हैअगर इसके विकास में उठाए गए कदम राजनीति का शिकार ना हो।
    विदेशियों को पश्चात्यता से टशन दिखाना भूल होगी। तो क्यूँ न योग जैसी हमारी सांस्कृतिक जड़ों को हमारे समर्पण से सींच कर हम गर्व करने का मौका भुना ले। योग के ब्रांड एंबेसेडर बनना हमारा हक भी है और जिम्मेदारी भी।इसलिए आओ मिलकर योग करें और योग का प्रचार करें।
    सबको सूर्यनमस्कार ।
    #Kapil
    #InternationalYogaDay
    Guest likes 1
    Post Comments Now
    Comments