Participating partners:


    काशी हिन्दू विशवविद्यालय मात्र शिक्षालय नही वरन संस्कृति का केन्द्र है

  • Vyomesh Chitravansh
    Vyomesh Chitravansh
    • Posted on September 24, 2017
    काशी हिन्दू विशवविद्यालय मात्र शिक्षालय नही वरन संस्कृति का केन्द्र है
    ..कि सत्य पहले फिर आत्मरक्षा : हमे गर्व है अपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कारे पर, व्योमेश चित्रवंश की डायरी, 24 सितंबर 2017, रविवार
    आज जब कुछ बाहरी कुत्सित प्रवृत्ति के लोगो द्वारा हमारे प्रिय बीएचयू की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है ऐसे मे हम जैसे बीएच यू के पुरा छात्रें का दुखी होना स्वाभाविक है, हमानते है कि हमारी छोटी बहनो के साथ गलत हुआ, उनकी मॉगे जायज थी, जिस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत थी, हम यह भी मानते है कि मौजूदा वाईस चॉसलर जी सी त्रिपाठी ( कुछ मित्र उन्हे गोबर चंद्र भी कहने लगे है) ने अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से पालन नही किया. पर महामना की प्रतिमा पर कालिख ,बाप रे बाप, यह अक्षम्य है, मेरे हिसाब से इसके लुये लाठीचार्ज क्या गोलीबारी भी बहुत ही छोटा दण्ड है, इसे कत्तई क्षमा नही किया जाना चाहिये. अब सत्य की जानकारी होने लगी है कि पकड़े गये उपद्रवकारियों मे एक बड़ी संख्या बाहरियो की है जो बीएचयू की संस्कृति पर जलाने विश्वविद्यालय का छाप लगाना चाहते है, यह हम बनारस वालों, बीएचयू के पुरा व वर्तमान छात्रो, महामना की बगिया से दैहिक दैविक भौतिक आध्यात्मिक व भावनात्मक संबध रखने वालो को स्वीकार्य नही है .
    हमे अपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय पर गर्व है, हममे महामना की बगिया का तृणपत्र होने का आत्मसम्मान है क्योकि हमारे रगों मे महामना के मानस का मंत्र कि 'सत्य पहले फिर आत्मरक्षा' आज भी प्रवाहित हो रही है , इसलिये अपने व अपने विश्वविद्यालय के सम्मान के लिये हम अंतिम क्षणों तक संघर्ष करने को दृढ.प्रतिग्य हैं.

    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।
    यह तीन लोकों से न्यारी काशी ।
    सुज्ञान धर्म और सत्यराशी ।।
    बसी है गंगा के रम्य तट पर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    नये नहीं हैं यह ईंट पत्थर ।
    है विश्वकर्मा का कार्य सुन्दर ।।
    रचे हैं विद्या के भव्य मन्दिर, यह सर्वस्रष्टि की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    यहाँ की है यह पवित्र शिक्षा ।
    कि सत्य पहले फिर आत्मरक्षा ।।
    बिके हरिश्चन्द्र थे यहीं पर, यह सत्यशिक्षा की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    यह वेद ईश्वर की सत्यवानी ।
    बने जिन्हें पढ के ब्रह्यज्ञानी ।।
    थे व्यास जी ने रचे यहीं पर, यह ब्रह्यविद्या की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    यह मुक्तिपद को दिलाने वाले ।
    सुधर्म पथ पर चलाने वाले ।।
    यहीं फले फूले बुद्ध शंकर, यह राजॠषियों की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    सुरम्य धारायें वरुणा अस्सी ।
    नहायें जिनमें कबीर तुलसी ।।
    भला हो कविता का क्यों न आकर, यह वाक्विद्या की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    विविध कला अर्थशास्त्र गायन ।
    गणित खनिज औषधि रसायन ।।
    प्रतीचि-प्राची का मेल सुन्दर, यह विश्वविद्या की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    यह मालवीय जी की देशभक्ति ।
    यह उनका साहस यह उनकी शक्ति ।।
    प्रकट हुई है नवीन होकर, यह कर्मवीरों की राजधानी ।
    मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी ।।
    – शान्तिस्वरूप भटनागर
    (बनारस,24 सितंबर 2017, रविवार)
    http://chitravansh.blogspot.com
    Post Comments Now
    Comments