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    अंतराष्ट्रीय फलक पर गरमाती सियासत और भारत की बढ़ती मुसीबत

  • Pradeep kumar
    Pradeep kumar
    • Posted on June 8
    अंतराष्ट्रीय फलक पर गरमाती सियासत और भारत की बढ़ती मुसीबत
    अंतराष्ट्रीय फलक पर गर्माती सियासत और भारत की बढ़ती मुसीबत---------------- -------------------------------------------
    अंतराष्ट्रीय फलक पर जहां एक और खाड़ी देशों ने कतर से अपने राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए ये कह कर की कतर मुस्लिम चरम पंती संगठनों की मदद कर रहा है तो दूसरी ओर ट्रम्प जी ने पेरिस जलवायु समझौते से अपने हाथ खींच लिए ये कहकर की इससे भारत और चीन को काफी मदद मिल रही है मतलब साफ़ सभी अपना उल्लू सीधा करने में लगे है मार्क्सवादियों का विचार की समाज कोऑपरेशन से चलता है कुछ डूबता सा नजर आ रहा है।
    जैसा की आप सब वाकिफ है की क़तर देश से सात राज्यो ने अपने राजनयिक सबंध तोड़ लिए मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, यमन,और इनका समर्थन मालदीव और लीबिया ने किआ इन देशों का आरोप है कि वह मुस्लिम ब्रदरहुड चरमपंथी इस्लामिक संगठन अलकायदा और आइस आइस को समर्थन दे रहा है।
    पूरा मसला ये है कि तनाव की इस्थति 2013 से शुरू हुई जब मिस्र के इस्लामिक राष्ट्रपति मुहम्द मोर्सी को सेना ने अपदस्त कर दिया क़तर मुहम्द मोर्सी का समर्थक था जो की जो चरमपंती मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन का सदस्य था मोर्सी पर आरोप था कि उसने मिस्र के खुफिया दस्तावेज क़तर को सौंपे थे हाल ही में क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने एक विवादस्पद बयान दिया जिससे मसला और भी गरमा गया
    यहाँ पर एक बात समझने की यह है कि दामन किसी का भी साफ़ नहीं है खाड़ी के अलग अलग देश अपनी मनपसंद के आतंकी गुटो की मदद करते है सीरिया में सलाफी गुटो को सऊदी अरब से मदद मिलती रही है तो इस्लामी ब्रदरहुड के चरंपन्ति संगठन को क़तर से सीरिया में दोनों देशो कतर और सऊदी अरब का एक ही मकसद रहा है बशर अल असद को सत्ता से हटाना।
    सऊदी अरब इस समय क़तर से काफी खफा है इसका मुख्य कारण ईरान की तरफ क़तर का रुझान है पिछले दिनों क़तर के शासक शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से बात की तो सऊदी अरब इससे काफी नाराज हुआ । ट्रम्प के ईरान विरोधी तेवर से भी सऊदी अरब का हौसला बुलंद हो रहा है ध्यान रहे ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने सऊदी अरब को ही अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में चुना था और सऊदी अरब के शासक सलमान बिन अब्दुल अजीज ने ट्रम्प को अपने यहाँ के सबसे बड़े नागरिक सम्मान किंग अब्दुल अजीज मेडल से भी नवाजा था ट्रम्प साहब ने ईरान को आतंक को बढ़ावा देने वाला देश भी करार दिया पर भारत के लिए चिंता का विषय यह है कि खाड़ी देशों में भारतीय काम करते है संयुक्त अरब अमीरात में 25-26 लाख लोग और सऊदी अरब में 29-30 लाख लोग कार्यत है और विदेशी मुद्रा देश में भेजते है इन सब से उन्हें काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ सकता है भारत सऊदी अरब से सबसे ज्यादा तेल लेता है और क़तर से प्राकृतिक गैस अगर तेल के दाम बढे तो भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है उसके ऊर्जा क्षेत्र में आज अमरीका भले ही वार्ता से इन देशो को इनके मसले सुलझाने को कह रहा है मगर आज जो खाड़ी देशों के बीच तनातनी चल रही है उसमें अमरीका का योगदान भी कम नहीं है भारत की पूरी कोशिश है कि इन देशो से उसकी अर्थव्यवस्था पर कोई आंच न आए और आखिर हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री माननीय नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का कुछ तो लाभ देश को मिले पता चला रिश्ते भी ख़राब और आने जाने का खर्चा सो अलग।
    मुद्दा काफी पेचीदा है हम आशा करते है कि ये देश अपने मतभेदों को वार्ता के जरिए जल्द ही सुलझा ले।
    धन्यवाद
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