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  • “अभिव्यक्ति - देश की आशा, हिंदी भाषा”.... हमारा स्वाभिमान है हिंदी, देश की पहचान है हिंदी
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Bol India Bol Abhivyakti group

  • Dr. Bharti Aggarwal
    Dr. Bharti Aggarwal: गुलाब में रफू नहीं होता करीम रफूगीर, कुशल कारीगर
    हर कटा-फटा, पुराना उधड़ा
    करता है रफू।
    फटने उधड़ने से बनी खाई
    अपने महीन धागों से बुनकर
    बाँधता है सेतु
    पाटता है खाई
    करता है एकदम चकाचक दुरूस्त।
    करीम के आँगन में लगा गुलाब
    गुलाब की कटी-फटी पंखुरिया...  
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    September 13
  • Pratap Pandey
    Pratap Pandey: कचरा उठाती लड़की निःष्प्रभ ! किन्तु उदास नहीं
    हतप्रभ ! किन्तु निराश नहीं
    सड़क के किनारे लगे
    कूड़े के ढेर के पास
    खड़ी ।
    गहरी आँखों से
    कुछ ढूंढती ।
    फिर, सड़क पर जा रहे
    हँसते, खिलखिलाते
    धूल उड़ाते
    बच्चों को देखती ।
    फिर कुछ सोचकर
    अपनी नजरें
    फिर से अपने उद्द...  
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    September 13
  • Dr Pooja Tripathi
    Dr Pooja Tripathi: कुआँ पूजन “माँ आप मुझे ये एक रुपया रोज़ क्यों देती हो ” रिमी ने एक रूपये का सिक्का हाथ में भींचते हुए कहा .माँ ने बेटी को पुचकारते हुए कहा “शाम को जब आप दादी के साथ कीर्तन में जाओ तो इसको श्याम जी को चढ़ा कर आप भगवान से जो मांगोगे वह मिलेगा .“ रिमी सोच में पड़ गयी ,पि...  more September 11
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: सपने : ~~~~~~~~~~~~~
    हम सभी मुंगेरीलाल हैं ,
    ये सपनों का संसार है ।
    हैं बेचते कितने सपने को ,
    सौदागर सपनों के कहलाते ।
    सपने हमारे सच ना हुए ,तो
    सपनों में ही हम बिक जाते ।
    हम सभी मुंगेरीलाल हैं ,
    ये...  
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    December 7
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: मेरे पत्र का रजत जयंती ।। संस्मरणात्मक - कहानी ।। ☆ मेरे वो 111 रुपए ☆
    ~~~~~~~~~
    { अतीत के चलचित्र }
    *********************
    फिर से चुनाव का दौर चल पड़...  
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    December 5
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: चमचे कैसे - कैसे : चम्मच पात्र का एक ऐसा वस्तु है, जो जितनी सरलता से पात्र में रखे हुए खाने की सामग्री को मुंह तक पहुंचाएगा, उतना ही ज्यादा स्वाद और एहसास दिलाएगा । चम्मच में ज्यादा सामग्री भर दें, तो वह सामग्री नीचे गिरने लगता है । फिर चम्मच को पुन: पात्र में डालना पड़ता है...  Read more November 28
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: एक - कहानी : ☆ एक डॉक्टर की मौत ☆
    ~~~~~~~~~~~~~~~
    आज एक बार फिर से अपने कैबीन में बैठकर पचास साल पहले की घटना याद करते सहम सा गया, डॉ. विनोद ।
    एक बड़ा सा क्लीनिक, चार सहायक, प्रशिक्षु डॉक्टर, छ: कम्पाउंडर, अन्य कर्मचारी, दिनभर में आते-जाते ...  
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    November 22
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: जमीर को सलामत रखो : ~~~~~~~~~~~~~
    जमीन तो बना ली
    क्या जमीर सलामत है,
    बगैर जमीर के
    क्या काम जमीन की ।
    सलामत है जमीर
    तो जमीन बन जायेंगी,
    देर ही सहीं
    खु...  
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    November 14
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: पिता की याद में... आज भी ! जो बनी प्रेरणा :: बाबूजी कह गये,
    बेटा ;
    चिता को अग्नि देकर
    जब,
    लौटोगे मुझसे अकेला ।
    पर,
    मत रोना ;
    मेरी कही बातों का
    प्रत...  
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    November 11
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: शब्द साहित्य : ☆ "इत्तेफाक" ☆
    ~~~~~~~~ इत्तेफाक ! क्या है आखिर, इत्तेफाक ? कहीं कोई विचार मन में आ जाते , तो उस विषय पर सोच पुन: मन में आए कि, वह विचार पूर्ण हो जाये । और यदि सच में ऐसा ही कुछ हुआ ! तो वह इत्तेफाक हो गया ।
    इत्तेफाकन द...  
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    November 10
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: एक - कहानी ।। वो दस दिन ।। शरद जैसे ही दुकानदार से पाव-भाजी का पैकेट लेकर अपने दस साल की गुड़िया की तरफ पलटा, नजर अचानक सामने टिक गई ।
    अचानक गुड़िया बोली - देना पापा... जैसे ही गुड़िया की बोली शरद के कानों में गुंजी, नजर हटी ; सामने खड़ी महिला से... !
    शरद - आप यहाँ ... कैसे ?
    स...  
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    November 8
  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi: ओस की बूँद ।। ☆ ओस की बूंद ☆
    ~~~~~~~~~
    कैसी है
    यह,
    ओस की बूंद ।
    जैसे,
    मोतियों की माला...  
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    November 7
  • Dhananjay Tiwari
    Dhananjay Tiwari: है आँखों में नींद नहीं है आँखों में नींद नहीं
    मंजिल का स्वपन जो आया है|
    बीत गयी असंख्य राते कही,
    बड़ी शिद्दत से मौका पाया है||
    बिछड़ गए अनगिनत पल विचार में ही,
    अब कर गुजरने का वक़्त आया है|
    देर आये दुरुस्त ही सही,
    उन विचारो ने ही परचम लहराया है||
    बाँध कफ़न अब परिश्रम का,
    परिस्तिथिओ...  
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    July 13
  • vijay kumar
    vijay kumar: वो प्यारी आँखों वाली वो प्यारी आँखों वाली.
    सपनो में है सझदा वो आँखों वाली..
    हर जगह नजर आती है.
    हर दम मुझे सताती है.
    करीब आकर फिर दूर जाकर.
    हर पल पास बुलाती है.
    अपना नक्श दिखाकर
    ...  
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    November 23, 2016
  • vijay kumar
  • Rajesh Garg
  • nitin kumar tyagi
    nitin kumar tyagi: हिंदी वतन है हमारा, हिंदी भाषा”....”.... हमारा स्वाभिमान है हिंदी, देश की पहचान है हिंदी नितिन कुमार त्यागी
    चैयरमैन
    जय हिन्द एंटी कॉरप्शन सोसाइटी
    रूड़की , हरिद्वार
    October 10, 2016
    • nitin kumar tyagi
      nitin kumar tyagi गरीबी बचपना आने ही नहीं देती है, बच्चे अपने परिवार का भार उठाने की मज़बूरी में बचपन में ही जवान हो जाते हैं और जवानी से पहले बूढ़े. हालाँकि ध्यान से देखो तो वह बच्चे भी अपने ही लगते हैं, उनमें भी अपने ही बच्चों का अक्स नज़र आता है. कुछ बच्चों के पास सबकुछ है...  Read more
    • nitin kumar tyagi
      nitin kumar tyagi गरीबी बचपना आने ही नहीं देती है, बच्चे अपने परिवार का भार उठाने की मज़बूरी में बचपन में ही जवान हो जाते हैं और जवानी से पहले बूढ़े. हालाँकि ध्यान से देखो तो वह बच्चे भी अपने ही लगते हैं, उनमें भी अपने ही बच्चों का अक्स नज़र आता है. कुछ बच्चों के पास सबकुछ है...  Read more
  • Mithilesh Kumar
    Mithilesh Kumar: हिंदी हैं हमारी भाषा हैं हम हिंदी हैं हमारी हिंदी भाषा
    रह्ते हम हिंदी मैं गाते हम हिंदी मैं
    सोते भी हम हिंदी मैं...हमारी शान हैं हिंदी
    पढ़ते भी हम हिंदी लिखते भी हिंदी
    हैं हमारी भाषा ही हिंदी...
    हमारा समाज हैं हिंदी
    हमारा कानून हैं हिंदी
    हमारा टेलीविज़न हैं हिंदी
    हमारा मोबा...  
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    October 7, 2016
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      vijay kumar1 Guest Likes
    • Mithilesh Kumar
      Vinod Kumar saxena मित्र हिन्दी वना दी गई गरीबों की भाषा
      अंग्रेजी आज भी है अमीर की भाषा
      कानून भी लिखा है योर आँनर है भाषा
      हम दूर है वहुत हिंदी से प्यारी लगी आकी भाषा
      जेल का मैनुअल कोर्ट का सेमुअल
      हिंदी मे वदल न पाए हम उत्तर से दझिण
      पूर्व से पश्चिम अलग अलग भाषा
      मान पात...  Read more