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    बैसाखी - जेठ की गर्म हवा :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on April 14
    बैसाखी - जेठ की गर्म हवा :


    हल्की सी चली
    गर्म हवा,
    भरी दुपहरी की ;
    सीने में चुभन सी होती रही ।
    पत्ते हैं जैसे ये,
    पंखे झले ;
    बस,
    बैसाखी - जेठ की पुरवाई है ये ।।
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