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    बढे़ चलो...

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on April 6
    बढे़ चलो...
    बढ़े चलो बढ़े चलो...
    है,
    जिंदगी हसीन !
    तुम क्यों,
    फिक्र मंद हो ?
    आँख खोला
    खुद रोया !
    लोग हंसे !!
    अब,
    हंसते जिंदगी बिता लें.
    क्या पता,
    आंख बंद हो ;
    तब,
    मिले ना मिले मुस्कराने.
    जिंदगी का सफर
    गर,
    काँटों का ताज हो ;
    क्या फिक्र,
    गम मिटा लो
    बढ़े चलो बढ़े चलो.
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