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    •~ बे-चैन रात ~•

  • Aayush
    Aayush
    • Posted on February 11
    •~ बे-चैन रात ~•
    दिन तो बे-करार ही था,
    अब रातें भी बे-चैन हो रही..
    नींद भी पलको पे बैठ,
    चाँदनी निहारती रही .....2.।।
    बेशक दिल तो था पास मेरे,
    पर ख्यालो में यादें उनकी ही आती रही...।
    दिन तो बे-करार ही था,
    अब रातें भी बे-चैन हो रही..।।
    उनकी शबनमी झलक इन निगाहों ने देखा..
    नूर-ए-शबनम अभी तक पी है रही ,
    उनकी जुल्फों की घटाए भी..
    गरज हम पे बरसती रही...।
    दिन तो बे-करार ही था,
    अब रातें भी बे-चैन हो रही...।।
    नींद भी पलको पे बैठ,
    चाँदनी निहारती रही...।
    साजिशें खूब हवाओं ने भी रची..
    फिर भी खुशबू उनकी हम तक आती रही...,
    उनके तबस्सुम-ए-हलचल की खनक..,
    गीत कानो में मेरे गुन-गुनाती रही..।
    दिन तो बे-करार ही था,
    अब रातें भी बे-चैन हो रही....।।
    नींद भी पलको पे बैठ,
    चाँदनी निहारती रही...।



    आयुष राज "विजय"
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