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    मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है

  • dinesh kumar
    dinesh kumar
    • Posted on March 6
    मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है
    मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है। उन्होने मुझे अच्छे-बुरे को समझने की शिक्षा दी। छात्र जीवन के दौरान जब मैं घर-घर अखबार बांट कर वापस आता था, तो मां के हाथ का नाश्ता तैयार मिलता। पढ़ाई के प्रति मेरे रुझान को देखते हुए मेरी मां ने मेरे लिए छोटा-सा लैम्प खरीदा था, जिससे मैं रात को 11 बजे तक पढ़ सकता था। मां ने अगर साथ न दिया होता तो मैं यहां तक न पहुचता
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    Comments (3)
    • dinesh kumar
      dinesh kumar जो अपने दिल से काम नहीं करते जिंदगी में भले ही कुछ पा लें
    • dinesh kumar
      Kumar yadav हमें दुनिया तभी याद रखेगी
    • dinesh kumar
      dinesh kumar आर्थिक संपन्नता और सांस्कृतिक विरासत