Participating partners:


    मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है।

  • Aarish Khan
    Aarish Khan
    • Posted on March 8
    मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है।
    मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है। उन्होने मुझे अच्छे-बुरे को समझने की शिक्षा दी। छात्र जीवन के दौरान जब मैं घर-घर अखबार बांट कर वापस आता था, तो मां के हाथ का नाश्ता तैयार मिलता। पढ़ाई के प्रति मेरे रुझान को देखते हुए मेरी मां ने मेरे लिए छोटा-सा लैम्प खरीदा था, जिससे मैं रात को 11 बजे तक पढ़ सकता था। मां ने अगर साथ न दिया होता तो मैं यहां तक न पहुचता
    Post Comments Now
    Comments (1)
    • Aarish Khan
      Pankaj Srivastava मैं अपने बचपन के दिन नहीं भूल सकता, मेरे बचपन को निखारने में मेरी मां का विषेश योगदान है।