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    बिहार चुनाव में नेताओं की कथनी और करनी का अंतर

  • Dilip Jha
    Dilip Jha
    • Posted on October 22, 2015
    बिहार चुनाव में नेताओं की कथनी और करनी का अंतर
    बिहार का चुनाव इस मुद्दे के साथ की रोजगार, शिक्षा, कानून-व्यवस्था, बिजली उत्पादन में सुधार और समस्त जन समस्या का समाधान करने का होना चाहिए न की अपनी जाती को ढूढने और संख्या बल दिखाने की और आरक्षण का गोलगप्पा या लालीपाप का सपना दिखाने का ।
    लेकिन हमारे बिहार के मुर्खाधीश कर्णधार श्रीमान लालू प्रसाद और सिर्फ कुर्सी की चाहत का ख्वाब देखने वाले श्रीमान नितीश कुमार इन दोनों ने मिल कर २५ वर्ष बिहार में राज किया लेकिन बिहार का विकास नहीं कर पाये।
    लालू प्रसाद को लोग कैसे नेता मानते है? बिहार को या समाज को मजबूत करने में लालू प्रसाद का क्या योगदान है? सिर्फ समाज को तोड़ने का काम लालू प्रसाद का है। लालू का योगदान जातीबाद के बीज बो कर बिहार को तोड़ने का और बिहार की शिक्षा का लालूकरण ( हम नहीं पढ़े तो किसी को नहीं पढने देंगे ) करने का है। लालू यदुबंसियो ( यादवो ) के बड़े हितेषी बने है तो अपने पंद्रह वर्ष के शासन में कितने प्रतिशत अपने जाती का कल्याण या उत्थान किया। हां इतना किया की अपनी जाती को आपस में हम बलवान का बीज बो कर फुट करबा दिया। बिहार का जो जाती ( यादव ) या मूल मेहनतकश था आज वह सिर्फ लालू की तरह नेता बनना चाहता है। लालू खुद को धर्मनिरपेक्ष कहता है तो क्यों नहीं अपनी संतानो की शादी अपने धर्म से बहार के धर्म में किया ?
    रही बात आरक्षण की तो आजादी के बाद इतने वर्षो से आरक्षण की व्यवस्था है तो फिर जिन जातियों को आरक्षण मिला हुआ है। उन जातियों अब तक उत्थान क्यों नहीं हुआ ?
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    Comments (1)
    • Dilip Jha
      Raj Sabhi janta kya chahti h sarkar se, bas yahi na ki sari subidha
      mile jo uska haq hai. Chahe wo koi bhi Govenment kyo na ho?
      Janta kisi bhi sarkar ko harana ya jitana nahi chahti hai janta
      to samjh hi ni pati h sahi kaun h Aur galat kaun? But ye ...  Read more