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    कुआँ पूजन

  • Dr Pooja Tripathi
    Dr Pooja Tripathi
    • Posted on September 11, 2015
    कुआँ पूजन
    “माँ आप मुझे ये एक रुपया रोज़ क्यों देती हो ” रिमी ने एक रूपये का सिक्का हाथ में भींचते हुए कहा .माँ ने बेटी को पुचकारते हुए कहा “शाम को जब आप दादी के साथ कीर्तन में जाओ तो इसको श्याम जी को चढ़ा कर आप भगवान से जो मांगोगे वह मिलेगा .“ रिमी सोच में पड़ गयी ,पिछली बार उसने माँगा था कि दादी ,माँ को डांट ना लगाये पर कल ही तो माँ रो रही थी . अब वो एक रुपया मंदिर में नहीं चढ़ायेगी और अपने पास छुपा के रखेगी .
    अब रोज़ माँ रिमी को पैसा देती पर रिमी उसे छुपा कर रख लेती और कभी कभी बाज़ार से टॉफी खरीद लेती.इधर कुछ दिनों से घर में लड्डू बन रहे हैं जिन्हें दादी हाथ लगाने नहीं देती ,कहती है तेरी चाची को भाई होगा फिर कुआँ पूजा होगी उसके बाद ये लड्डू खाना .
    रिमी दौड़कर माँ के पास गयी ,माँ सिमी को दूध पिला रही थी ,माँ से उसने पूछा “ माँ जब मेरी बहन आई थी तब कुआँ पूजा के लड्डू तुमने मुझे क्यों नहीं दिये ? माँ ने कहा “ बेटा तब कुआँ पूजा नहीं हुई थी .“ पर क्यूँ –रिमी ने कहा .माँ –“क्यूंकि तेरी बहन आयी थी भाई नहीं” ,रिमी को ये सब कुछ समझ नहीं आया पर उसने देखा की माँ की आँख में आंसू थे .उसे लगा अच्छा ही किया उसने कि श्याम जी को पैसे नहीं दिये ,माँ तो अब भी रोती है .
    सारे लड्डू बनते देख रिमी का होमवर्क करने में मन नहीं लग रहा था .उसने सोचा एक लड्डू खा लूंगी तो भाई को पता भी नहीं चलेगा ,वैसे भी वो अभी तक आया ही नहीं ,वह धीरे से रसोई में गयी और ढक्कन उठाया तो इतने सारे लड्डू देखकर रिमी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था .उसने एक लड्डू हाथ में लिया और वापस जाने लगी तभी एक ज़ोर की आवाज़ आई ,रिमी पीछे पलटी तो देखा ढक्कन ज़मीन पर गिरा था.तभी दादी दौड़ते हुए रसोई में आई,रिमी को देख कर सारा माज़रा समझ गयी .दादी ने एक जोर का तमाचा जड़ दिया रिमी को “चोरी करती है,पूजा का लड्डू जूठा कर दिया मनहूस ,अपने पीछे दो और लड़कियां ले आयी .“
    रिमी बहुत देर तक सुबकती रही,माँ ने प्यार किया,समझाया और बोला “आज मैं तुझे 2 रूपये दूंगी ,एक रूपये श्याम जी को चढ़ाना और दूसरे से टॉफी ले लेना.” रिमी मन ही मन खुश हुई “आज तो दो टॉफी खरीदूंगी.“घर में बहुत हलचल थी ,चाची को तो सुबह से ही हॉस्पिटल ले गयी थी दादी .”आज मंदिर नहीं जाना ,आज तुम्हारा भाई आएगा ना “माँ ने बताया .रिमी ने सोचा ,भाई आयेगा ,लड्डू बनेंगे ,कुआँ पूजा होगी पर क्या माँ फिर रोयेगी ,यह सोचते सोचते रिमी सो गयी .
    शाम को उठी तो देखा दादी घर पर थी ,पूरे घर में दौड़कर देखा तो भाई कहीं नहीं दिखा .माँ रसोई में थी ,उसने पूछा “माँ! भाई कहाँ हैं ?” माँ ने धीरे से कहा “दादी के पास मत जाना रिमी , भाई नहीं तुम्हारी चाची को सुंदर सी बेटी हुई है . रिमी ने कहा “ तो क्या कुआँ पूजा नहीं होगी?” माँ ने कहा “नहीं”
    रिमी- और लड्डू ?
    माँ ने रिमी को गुस्से से देखा,रिमी दौड़ती हुई श्याम जी के मंदिर की ओर गयी और कल के 2 रूपये चढ़ा दिये .
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